शाही महाभारत की रोचक कहानी – अकबर बीरबल हिंदी कहानी | akbar birbal hindi kahani -shahi mahabarat ki rochak kahani

शाही महाभारत अकबर बीरबल हिन्दी कहानी

शाही महाभारत अकबर बीरबल हिन्दी कहानी 

भारतीय लोककथाएँ राजाओं और उनके साम्राज्यों की कहानियों से भरी हुई हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी किंवदंतियाँ और कहानियाँ हैं। ऐसी ही एक कहानी जिसने पीढ़ियों की कल्पना पर कब्जा कर लिया है वह है अकबर, बीरबल और शाही महाभारत की कहानी। यह कहानी न केवल मनोरंजक है बल्कि एक नैतिक शिक्षा भी देती है, जो इसे हिंदी साहित्य में एक कालजयी क्लासिक बनाती है।

अकबर बीरबल हिन्दी कहानी | Hindi Story 

बादशाह अकबर धार्मिक झगड़ों में नहीं पड़ते थे। उनके शासनकाल में हिन्दू-मुसलमान सब समान दृष्टि से देखे जाते थे। बादशाह के ऐसा करने से उनके मुसलमान रिश्तेदार खुश नहीं रहते थे। पर वे उनका बिगाड़ भी क्या सकते थे? अकबर बादशाह के लिए यहां तक कहा जाता है कि वह कभी-कभी हिन्दू के भेष में रहते थे, चंदन आदि लगाकर देवताओं के दर्शन भी किया करते थे। उन्होंने हिन्दुओं के धर्म-ग्रंथ रामायण, महाभारत आदि का भी अध्ययन किया था। महाभारत में उन्होंने पांडवों की विजय और उनका कौरवों के साथ युद्ध आदि का वर्णन पढ़ा था। तभी से उनके दिल में यह लालसा थी कि जैसे राम का चरित्र ‘रामायण’ में, कृष्ण का चरित्र भागवत में, पांडवों का चरित्र महाभारत में है, वैसे ही मेरा भी चरित्र पुस्तक रूप में प्रकाशित हो जिसका नाम ‘अकबर बादशाही महाभारत’ हो और इसमें मेरे पराक्रम, विजय, राज्य-विस्तार आदि का वर्णन हो। 

अकबर बादशाह ने अपना यह मंतव्य बीरबल से कहा और यह काम करने का भार भी उन्हें ही सौंप दिया। बीरबल राजी हो गए और उन्होंने ‘शाही महाभारत’ की रचना, योजना तैयार करते हुए अकबर बादशाह को बताया- ‘‘हुजूर! महाभारत में सवा लाख श्लोक हैं। इतने ही जब शाही महाभारत में होंगे, तभी समानता हो सकती और उतने ही रूपये यानी कि प्रति श्लोक एक रूपया प्राप्त होने पर ही काम शुरू किया जा सकेगा।’’

अकबर बादशाह ने खजांची को सवा लाख रूपयें पेशगी देने का हुक्म दे दिया। रूपये प्राप्त करके बीरबल ने इधर-उधर जहां आवश्यक समझी वहां बाग, सड़कें तथा कुएं और बावड़िया बनवा दीं। कुछ रूपया कंगालों, अपाहिजों को देने में लगा दिया। इस प्रकार कुछ समय बीता तो एक दिन ‘शाही महाभारत’ की चर्चा हुई। 

अकबर बादशाह ने बीरबल से पूछा-‘‘अभी उसकी तैयारी में क्या विलंब है?’’

बीरबल ने कहा-‘‘जल्दी तैयार हो जाएगा।’’

इस प्रकार कुछ दिन और बीते तो एक दिन बीरबल सादा कागजों को प्रस्तकालय रूप में काटवाकर उसे मोटी गड्डी में नीचे तथा ऊपर मजबूत काठ की दफ्ती रख, मजबूत तथा उत्तम कपड़े से बांध नौकर के सिर पर रखवाकर शाही महल में पहुंचे। अकबर बादशाह बीरबल के साथ एक बंधे हुए ग्रंथ को देखकर समझ गए कि ‘शाहीमहाभारत तैयार हो गया। उन्होंने बीरबल को अपने पास बैठाया और ग्रंथ के संबंध में पूछताछ की। 

बीरबल बोले-‘‘ग्रंथ तो करीब -करीब तैयार ही है। इसके एक खास हिस्से के संबंध में आपसे मशवरा करना है कि ‘महाभारत’ की मुख्य नायिका द्रौपदी थी, आपकी ‘शाही महाभारत’ की मुख्य नायिका कौन होगी? आपकी बहुसंख्यक बेगमों में से किसको यह महत्वपूर्ण पद प्राप्त होगा? इसका हुक्म मिलते ही आपकी अमुक बेगम से आवश्यक बातें जानकर गं्रथ को जल्दी ही पूरा करा दिया जाएगा।

अकबर बादशाह ने बड़ी बेगम को ही मुख्य नायिका मानने के लिए कहा। 

यह आज्ञा पाकर पुस्तक उठवाकर बीरबल बड़ी बेगम के यहां पहुंचे। कुशलक्षेप पूछने के बाद उन्होंने ‘शाही महाभारत’ की बेगम से चर्चा की और बताया-‘‘इसके तैयार होने मे केवल एक बात की देर है और यह बात मैं तभी बता सकता हूं जब आप यह प्रतिज्ञा करें कि मुझ पर किसी प्रकार भी नाराज न होंगी।’’

बेगम ने बेझिझक बात पूछने की बीरबल को आज्ञा दे दी। 

बीरबल मन ही मन खुश होते हुए बोले-‘‘पांडवों के महाभारत की मुख्य नायिका द्रौपदी के पांच पति थे। आप कृपया यह बताइए आपके कितने, पति हैं, ताकि ‘शाही महाभारत’ को पूर्णरूपेण तैयार कर दिया जाए। इसका जवाब आपसे ठीक-ठीक मिल सकता है, इसीलिए आपके पास आया हूं।’’

यह सुनते ही बेगम आग बबूला हो गईं। लेकिन अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण कर दांत पीसकर रह गईं। उन्होंने दासियों को हुक्म देकर ‘शाही महाभारत’ के रूप में कोरे कागजों की बंधी हुई जिल्द को जलवा दिया। बीरबल ने ऊपरी मन से बहुतेरी आनाकानी की, पर उनका कुछ वंश न चला। 

बीरबल ने कहा-‘‘बेगम साहिबा से किए गए सवाल का परिणाम यह हुआ कि वह बहुत ही गुस्से में हो गईं और उनकी आज्ञा से दासियों द्वारा शाही ‘महाभारत’ का अग्नि संस्कार हो गया।’’ शुरू से अन्त तक सारा हाल अकबर बादशाह को बताकर बीरबल आगे बोले-‘‘जहांपनाह! बेगम साहिबा पतिव्रता स्त्री हैं। मेरे सवाल पर वह क्रोध से आग बबूला हो गई, मैंने उन्हें समझाने-बुझाने का अत्यधिक प्रयास किया पर सब बेकार हो गया। आपका सवा लाख रूपया तथा मेरे इतने दिन का परिश्रम मैंने आंखों से जलकर राख होते देखा।’’

इस प्रकार अकबर बादशाह की ‘शाही महाभारत’ बनवाने की लालसा को बीरबल ने अपनी चतुराई से समाप्त कर दिया।

निष्कर्ष

महाभारत की कहानी कहानी कहने की शक्ति और लोगों के जीवन पर इसके प्रभाव का एक प्रमाण है। बीरबल ने अकबर की समस्या का जो चतुराईपूर्ण समाधान दिया, वह इस बात का उदाहरण है कि बुद्धिमत्ता और बुद्धिमत्ता कैसे घटनाओं की दिशा बदल सकती है। इस कहानी ने पीढ़ियों का मनोरंजन किया है और अब भी कर रही है, जिससे यह भारतीय लोककथाओं का एक प्रिय हिस्सा बन गई है।


शाही महाभारत की रोचक कहानी – अकबर बीरबल हिंदी कहानी | akbar birbal hindi kahani -shahi mahabarat ki rochak kahani शाही महाभारत की रोचक कहानी – अकबर बीरबल हिंदी कहानी | akbar birbal hindi kahani -shahi mahabarat ki rochak kahani Reviewed by Kahaniduniya.com on जून 23, 2023 Rating: 5

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