अकबर-बीरबल की कहानी: हाथी का पैर | Akbar birbal Hindi Kahani hathi ka pair


अकबर-बीरबल की कहानी: हाथी का पैर

हाथी का पैर अकबर बीरबल हिन्दी कहानी

akbar birbal hindi kahani हाथी पैर बहुत सुन्दर ज्ञान वर्धक अकबर बीरबल की कहानी में से एक कहानी यह भी है। अकबर बादशाह किसी बात से नाराज होकर बीरबल को भुला-बुरा कहकर वहां से कहीं दूर चले जाने कहते है। फिर बीरबल भी बादशाह अकबर के आज्ञा पालन करते हुए दूर दूसरे गांव चले जाते है। बीरबल के चले जाने के बाद राज्य अवस्था हो जाती है। रोज-रोज नई शिकायते आने लगती है। अब बादशाह अकबर को भी बीरबल याद आने लगती है। अब बीरबल को खोजने के लिए अकबर क्या करेगें। पढ़िए : akbar-birbal रोमाचक कहानी को। 

अकबर बीरबल हिन्दी कहानी : Hindi Story

एक दिन अकबर बादशाह और बीरबल का किसी बात पर झगड़ा हो गया। बीरबल  को गुस्सा आ गया, वह रूठकर दिल्ली से पंद्रह-बीस कोस की दूरी पर एक गांव में अपना नाम छिपाकर रहने लगे। गांव का पटेल भगवत सिंह भाटी राजपूत था। वह बड़ा दयालु था। जो कोई परदेशी इस गांव में आता उसकी वह बड़ी आव भगत करता था। बीरबल भी उसके गांव में बड़े आराम से दिन बिताने लगे। 

बीरबल के चले जाने के बाद अकबर बादशाह ने उनकी जगह पर अपने साले को नियुक्त किया। यह बात यद्यपि अकबर बादशाह को नापसंद थी, परन्तु बेगम को खुश रखने के लिए ऐसा करना उनके लिए एक मजबूरी भी  थी। 

उसको दीवान के पद पर नियुक्त हुए दस दिन भी न हुए थे कि शहर में अवस्था फैल हो गई। चारों ओर से नालिशें होने का तांता लग गया। 

अब अकबर बादशाह ने अपने साले की बुद्धि की परीक्षा लेेने बेगम और अन्य लोगों को कुछ दिखाने का विचार किया। एक बार अकबर बादशाह नए दिवान को साथ लेकर पीर साहब की दरगाह पर गए। लौटते समय उन्होंने धूल में हाथी के पैर का एक चिन्हृ बना देखा। 

उसको देखकर उन्होंने दीवान को तीन दिन तक इसकी स्वंय रक्षा करने का हुक्म दिया। हुक्म देकर अकबर बादशाह तो अपने महल में चले गए और नया दीवान हाथी के पैर के चिन्हृ का पहरा देने लगा। 

सारा दिन इसी प्रकार से बीत गया। दूसरे दिन भी उसको खाने को न मिला। इस प्रकार तीन दिन तक लगातार भूखे रहने और जागने से दीवान बहुत कमजोर हो गया। चौथे दिन उसने अकबर बादशाह के पास जाकर उस चिन्हृ की रक्षा करने का सविस्तार वर्णन सुनाया, जिसे सुनते ही अकबर बादशाह ने उसकी बुद्धि की थाह पा ली। 

फिर कुछ समय बाद अकबर बादशाह ने बीरबल की खोज के उद्देश्य से गांव-गांव मे यह आदेश भेज दिया कि दिल्ली में सरकारी कुएं का विवाद है, इसलिए अपने गांव के सभी कुओं को लेकर जो जमींदार नहीं आ सकेगा, उस पर दस-पन्द्रह हजार रूपये का जुर्माना किया जाएगा। 

अकबर बादशाह की यह आज्ञा जिस गांव में बीरबल रहते थे, वहां भी पहुंची। तब गांव के पटेल ने सब गांव वालों को एकत्रित किया और उनको अकबर बादशाह की आज्ञा सुनाई। फिर वह बोला-‘‘अकबर बादशाह बड़ा मूर्ख है, कहीं कुएं भी इस तरह कहीं जा सकते हैं। आप सब बताओ, अब क्या किया जाए। क्योंकि बादशाह अकबर की आज्ञा का पालन न होगा तो दस-पन्द्रह हजार रूपये दण्ड के देने होंगे।’’

उस समय पर बीरबल भी वहां मौजुद थे। उन्होंने यह बात सुनकर सोचा-‘बादशाह अकबर ने मेरी खोज करने के लिए यह नई युक्ति निकाली है। अब किसी भी तरह प्रकट होकर उनकी तरकीब सफल करना उचित ही है और ऐसा करने से मेरा और अकबर बादशाह दोनों का महत्व प्रकट होगा।’ यह सोचकर उन्होंने कहा-‘‘पटेलजी, आप चिंता न करें, तरकीब मैं बताऊंगा। आपने इतने दिनों तक मुझे अपने गांव में शरण दी है, उसका मुझको भी तो प्रतिफल देना चाहिए। आप मुझे और अन्य दो-चार आदमियों को साथ लेकर दिल्ली चलें और वहां नगर के बाहर डेरा डालकर अकबर बादशाह को कहलावा भेजा कि हम अपने कुओं को लेकर नगर के बाहर आ पहुंचे हैं। आप अपने कुओं को आगवानी के लिए भेजें। बिना आगवानी के हमारे कुएं नगर में नहीं घुसेंगे। इसका परिणाम यह होगा कि बादशाह कुएं को लेकर बाहर तो आ नहीं सकेंगे, इसलिए वह हमारा बहुत सत्कार करेंगे।’’

बीरबल की यह तरकीब सबको पसन्द आई और उसी दिन बीरबल को साथ लेकर गांव के मुखिया दिल्ली की ओर रवाना हुए। वहां पहुंचकर नगर के बाहर ठहरे और बीरबल के कहने के अनुसार पटेल ने जाकर  अकबर बादशाह से कहा-‘‘हम सब लोग अपने कुएं लेकर नगर के बाहर ठहरे हुए हैं, आप अपने कुओं को आगवानी के लिए भेजिए।’’

यह सुनते ही अकबर बादशाह तुरन्त ताड़ गए कि ऐसा जवाब बीरबल के सिवा कौन दे सकता है, वह अवश्य ही इसी गांव में हैं। यह सोचकर उन्होंने पटेल से पूछा-‘‘तुम्हें यह बात किसने बताई, सच-सच बताओ?’’

जमींदार पटेल ने कहा-‘‘कुछ महिनो से हमारे गांव में अजनबी एक परदेशी आकर ठहरा हुआ है, उसी ने हम सबको यह युक्ति बताई और वह हमारे साथ-साथ आया भी है।’’

अकबर बादशाह ने उसका हुलिया पूछा तो पटेल ने उसकी सूरत, चाल ढाल आदि के बारे में सब बातें बता दी। जिससे अकबर बादशाह को निश्चय हो गया कि अवश्य वह बीरबल ही हैं।

फिर अकबर बादशाह ने हाथी-घोड़े आदि बहुत-सी सवारियां बीरबल को लाने के लिए भेजीं। बीरबल बड़ी धूमधाम से नगर में आए। अकबर बादशाह ने बीरबल को पुनः दीवान के पद पर नियुक्त कर दिया और पटेल को ईनाम देकर विदा किया। बिरबल के आने के बाद आठ दिन में ही सारे शहर का प्रबंध पहले के समान ठीक हो गया और किसी प्रकार भी गड़बड़ ना रही। 

एक बार अकबर बादशाह की सवारी नगर से बाहर गई। लौटते समय अकबर बादशाह को हाथी का पैर धूल में छपा हुआ दिखाई दिया। अकबर बादशाह ने उसकी रक्षा करने के लिए बीरबल को आज्ञा दी। बीरबल इस आज्ञा को स्वीकार कर वहीं ठहर गए और सेवकों द्वारा उस जगह लोहे की एक खूंटी खड़ी करवाई। फिर सौ हाथ लम्बी रस्सी उस खंूटी से बांधकर आस-पास के निवासियों से कहा कि इस चिन्हृ की रक्षा के लिए उनके मकान तोड़े जाएंगे। 

वे लोग बीरबल की खुशामद करने लगे। उन्होंने किसी से किसी से पांच सौ और किसी से हजार रूपये लेकर लोगों को छुटकारा दिया। इस प्रकार थोड़ी ही देर में एक लाख रूपये इकट्ठे हो गए। फिर बीरबल ने अकबर बादशाह से मकानों को न तुड़वाने की प्रार्थना करने का वचन देकर महल का रास्ता नापा और रूपये राजकोष में जमा कर दिए तथा कोषाध्यक्ष से उन रूपयों की रसीद लेकर दरबार पहुंचे। 

बीरबल को दरबार में देखकर अकबर बादशाह ने आश्चर्यचकित होकर उनसे हाथी के पैर की रक्षा के विषय में पूछा। बीरबल ने कोई जवाब न देकर एक लाख रूपये की रसीद दिखा दी। 

अकबर बादशाह ने रसीद का मतलब पूछा। तब बीरबल ने कहा-‘‘हाथी के पांव के चिन्हृ की रक्षा करने के कारण यह रूपये उन्हें प्राप्त हुए हैं।’’ 

अकबर बादशाह और दरबारियों ने जब सुना तो वे आश्चर्यचकित रह गए। फिर अकबर बादशाह ने अपने साले को बुलाया और कहा-‘‘तुम हाथी के पैर के चिन्हृ की रक्षा करने में तीन दिन तक भूखे मरे और कुछ भी प्राप्त न कर सके और बीरबल ने बिना प्रयास के एक ही दिन में एक लाख रूपये कमा लिए। इससे तुम कदापि दीवान पद के योग्य नहीं हो।’’ यह सुनकर अकबर बादशाह का साला चुपचाप चला गया और फिर उसने दीवानगिरी के लिए कभी सिर न उठाया। बीरबल की ‘वाहवाही’ हुई और बहुत सत्कार मिला। 

निष्कर्ष

akbar-birbal के समाधान से बहुत प्रसन्न हुए और उनकी रचनात्मकता की प्रशंसा की। उस दिन के बाद से बीरबल अकबर के दरबार में और भी अधिक सम्मानित हो गये। यह कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प और रचनात्मकता से जटिल से जटिल समस्याओं को भी हल किया जा सकता है।


अकबर-बीरबल की कहानी: हाथी का पैर | Akbar birbal Hindi Kahani hathi ka pair अकबर-बीरबल की कहानी: हाथी का पैर | Akbar birbal Hindi Kahani hathi ka pair Reviewed by Kahaniduniya.com on जून 26, 2023 Rating: 5

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