सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर ने समय के साथ रनो का अम्‍बार लगा दिया है।

उन्‍होंने 29 जून, 2007 को दक्षिण अफ्रीका के विरूद्ध बेलाफास्‍ट (आयरलैंड) में खेलते हुए एक दिवसीय मैचों में 15000 रन पूर कर लिए।

इनते रन बनाने के बाद सचिन। विश्‍व के ऐसे प्रथम खिलाङी बन गए, जिन्‍होंने इतने बङे आंकङे को छुआ है।

विश्‍वके श्रेष्‍ठतम बल्‍लेबाज माने जाने वाले आस्‍ट्रेलियाई बल्‍लेबाज डॉन ब्रैडमैन ने एक बार सचिन के बारे में कहा था मैंने उसे टीवी पर खेलते हुए देखा और उसकी खेल तकनीक देखकर दंग रह गया। तब मैंने अपनी पत्‍नी को अपने पास बुला कर उसे देखने को कहा। हालांकि मैंने स्‍वयं को खेलते हुए कभी नही देखा, लेकिन मुझे महसूस होता है कि यह खिलाङी ठी वैसा ही खेलता है जैसा मैं खेलता था।

वास्‍तव में सचिन क्रिकेट का हिरो और एक ऐसा रोल मॉडल है जिसे सभी भारतीय पसन्‍द करते हैं। क की सी बात लगती है जब सचिन तेंदुलकर क्रिकेट क्षेत्र में उतरा-एक घुंघराले बालों वाला 15 वर्षीय सचिन, जिसकी भर्राई सी आवाज ने लोगों के दिल में स्‍थान बना लिया।



वह लगभग 15 वर्ष का ही था जब उसने 1988 में स्‍कूल के क्रिकेट मैच में काम्‍बली के साथ 664 रन बनाए थे। लोग उसके खेल का करिश्‍माई अंदाज देखते ही रह गए थे।

इसके बाद उसका क्रिकेट के मैदान में अन्‍तरराष्‍ट्रीय मैचों में प्रदर्शन्‍ इतना अच्‍छा रहा है कि लोग कहते हैं कि वह वाकई लाजवाब है।

सचिन तेंदुलकर ने 1989-90 में कराची में पाकिस्‍तान के विरूद्ध अपना पहला टेस्‍ट मैच खेल कर अपने क्रिकेट कैरियर की शुरूआत की थी।

तब से अब तक के कैरियर में सचिन ने उन ऊंचाइयों को छू लिया है, जिसे छूना किसी अन्‍य क्रिकेट खिलाङी के लिए शायद ही सम्‍भव हो सके।

आक्रामक बल्‍लेबाजी उसका अंदाज है। उसका बल्‍ला यूं घूमता है कि दर्शकों को अचम्भित कर देता है। यदि वह जल्‍दी आउट भी हो जाता है तो भी अक्‍सर अपना करिश्‍मा दिखा ही जाता है।

गेंदबाजी मे भी वह अपना करिश्‍मा कभी-कभी दिखा देता है। एक दिवसीय मैचों में दस हजार से अधिक रन बनाने वाला वह पहला बल्‍लेबाज है। उसने सौ से अधिक विकेट लेने का करिश्‍मा भी दर्शकों को दिखाया है। सचिन ने दर्शकों के मानस पटल पर अपने खेल की अविस्‍मरणीय छाप छोङी है।

उसने 20 टैस्‍टो और एक दिवसीय मैचों में अनेकों शतक व हजारों रन बना डाले हैं जितने आज तक कोई नहीं बना सका है।

जब सचिन केवल 11 वर्ष का था, तब वह बेहद शैतान था। मां-बाप को वह अपनी शैतानियों से परेशान करता रहता था।

एक बार वह शैतानी करते हुए पेङ से गिर गया। तब सचिन के बङे भाई अजीत के दिमाग में विचार आया कि उसे क्रिकेट की कोचिंग क्‍लास के लिए भेज दिया जाए ताकि उसकी अतिक्ति ऊर्जा खेलों में खर्च हो सके। कहा जा सकता है कि यह सचिन की अतिविशिष्‍ट जिन्‍दगी की शुरूआत थी।
आज सचिन 100 टैस्‍ट मैच खेलने वाला विश्‍व का 17 वां खिलाङी बन चुका है। सचिन ने 1989 में पाकिस्‍तान के विरूद्ध प्रथम अन्‍तरराष्‍ट्रीय मैच खेला था। तब सचिन केवल 16 वर्ष का था और प्रथम पारी में वह बहुत ही नर्वस व घबराया हुआ था। सचिन को तब यूं महसूस हुआ था कि शायद वह जिन्‍दगी में आगे अन्‍तरराष्‍ट्रीय मैच और नहीं खेल सकेगा।

अकरम और वकार की तेज गेंदों के सामने वह केवल 15 रन ही बना सका था। लेकिन दूसरे टेस्‍ट में जब उसे खेलने का मौका मिला तब उसने 59 रन बना लिए और उसके भीतर आत्‍मविश्‍वास जाग उठा।

सचिन देखने में सीधा-सादा इंसान है। वह अति प्रसिद्ध हो जाने पर भी नम्र स्‍वभाव का है।

वह अपने अच्‍छे व्‍यवहार का श्रेय अपने पिता को देता है। उसका कहना है, मैं जो कुछ भी हूं अपने पिता के कारण हूँ। उन्‍होंने मुझ में सादगी और ईमानदारी के गुण भर दिए हैं। वह मराठी साहित्‍य के शिक्षक थे और हमेशा समझाते थे कि जिन्‍दगी को बहुत गम्‍भीरता से जीना चाहिए। जब उन्‍हें अहसास हुआ कि शिक्षा नहीं, क्रिकेट मेरे जीवन का हिस्‍सा बनने वाली है, उन्‍होंने उस बात का बुरा नहीं माना। उनहोंने मुझसे कहा कि ईमानदारी से खेलो और अपना स्‍तर अच्‍छे से अच्‍छा बनाए रखो। मेहनत से कभी मत घबराओ।

सचिन को भारतीय क्रिकेट टीम का कैप्‍टन बनाया गया था, परन्‍तु 2000 में उन्‍होंने मोहम्‍मद अजहरूद्दीन के आने के बाद वह पद छोङ दिया।

सचिन, जिसे सुपर स्‍टार कहा जाता है, जीनियस कहा जाता है, जिसका एह-एक स्‍ट्रोक महत्‍वपूर्ण माना जाता है, अपने पूराने मित्रों को आज भी नहीं भूला है चाहे वह विनोद काम्‍बली हो या संजय मांजरेकर। जब मुम्‍बई की टीम में सचिन ने खेलना आरम्‍भ किया था तो संजय ने राष्‍ट्रीय टीम की ओर से खेला था। ये दोनों पुराने मित्र हैं।

क्रिकेट के अतिरिक्‍त सचिन को संगीत सुनना और फिल्‍में देखना पसन्‍द है। सचिन क्रिकेट को अपनी जिन्‍दगी और अपना खून मानते हैं।

क्रिकेट के कारण प्रसिद्धि पा जाने पर वह किस चीज का आनन्‍द नहीं ले पाते यह पूछने पर वह कहते हैं कि दोस्‍तों के साथ टेनिस की गेंद से क्रिकेट खेलना याद आता है।

29 वर्ष और 134 दिन की उम्र में सचिन ने अपना 100वां टैस्‍ट इंग्‍लैंड के खिलाफ खेला।

5 सितम्‍बर 2002 को ओवल में खेले गए इस मैच से सचिन 100वां टैस्‍ट खेलने वाला सबसे कम उम्र का खिलाङी बन गया।

सचिन के क्रिकेट खेल की औपचारिक शुरूआत तभी हो गई जब 12 वर्ष की उम्र में क्‍लब क्रिकेट (कांगा लीग) के लिए उसने खेला।

सचिन बङी-बङी कम्‍पनियों का ब्रांड एम्‍बेसडर बना है। एम.आर. एफ. टायर, पेप्‍सी, एडिडास, वीजा मास्‍टर कार्ड, फिएट पैलियो जैसी नामी कम्‍पनियों ने उसे अपना ब्रांड एम्‍बेसडर बनाया। बङी कम्‍पनियों में विज्ञापन के लिए उसकी सबसे ज्‍यादा मांग है।

1995 में सचिन ने 70 लाख पचास हजार (7.5 मिलियन) डालर का वर्ल्‍ड टेल कम्‍पनी के साथ 5 वर्षीय अनुबंध किया।

इससे सचिन विश्‍व का सबसे धनी क्रिकेट खिलाङी बन गया। इसके पूर्व ब्रायनलारा ने ब्रिटेन की कम्‍पनी के साथ सर्वाधिक 10 लाख 20 हजार डॉलर का अनुबंध किया था। सचिन ने 2002 में एक नया कीर्तिमान स्‍थापित किया।

अन्‍तरराष्‍ट्रीय मैचों में 20000 रन बनाने वाला वह एकमात्र खिलाङी बन गया है। उसने 102 टेस्‍ट मैचों में खेली गई 162 पारी में 8461 रन बनाने के अतिरिक्‍त 300 एक दिवसीय मैचों में 11544 रन बनाने का रिकार्ड स्‍थापित किया है।

उसके बारे मे कहा जाता है वह विवियन रिचर्ड, मार्क वा, ब्रायन लारा सब को मिलाकर एक है। तेंदुलकर मानो एक आदमी की सेना है। वह शतक बनाता है, उसे गेंद दे दो, वह विकेट ले लेता है, वह टीम के अच्‍छे फील्‍डरों में से एक है। हम भाग्‍यशाली हैं कि वह भारतीय हैं।

25 मई, 1995 को सचिन ने डाक्‍टर अंजलि मेहता से विवाह कर लिया। उनके दो बच्‍चे हैं। बङी बच्‍ची कानाम ‘सराह’ है जिसका अर्थ है कीमती। छोटा बच्‍चा बेटा है।

सचिन की अं‍जलि से 1990 मे मुलाकात हुई। सचिन ने एक बार इंटरव्‍यू में कहा था- मुझे उससे प्‍यार इसलिए हो गया क्‍योंकि उसके गाल गुलाबी हो उठते हैं।

सचिन का पूरा नाम सचिन रमेश तेंदुलकर है।

उसका नाम उसके माता-पिता ने अपने पंसदीदा संगीत निर्देशक सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा।

सचिन ने अपना पहला साक्षात्‍कार दादर के एक ईरानी रेस्‍टोरेंट में अपने बङे भाई से दिलवाया था क्‍योंकि तब उसमें अधिक आत्‍मविश्‍वास नहीं था।

सचिन को बचपन में क्रिकेट से कोई विशेष लगाव था। क्रिकेट में शामिल होने पर वह तेज गेंदबाज बनना चाहता था, इसलिए डेनिस लिलि से प्रशिक्षण के लिए एम. आर. एफ. पेस एकेडमी मे गया। तब उसे बताया गया कि उसे बल्‍लेबाजी पर ध्‍यान लगाना चाहिए।

सचिन को अपनी मां के हाथ का भोजन बहुत पसन्‍द है विशेषकर सी-फूड। इस कारण उसके आने पर वह विशेष रूप से मछली मंगवाती है।

सचिन के बार में कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍य


मात्र बारह वर्ष की उम्र में सचिन ने क्‍लब क्रिकेट (कांगा लीग) में खेलना शुरू किया।

बाम्‍बे स्‍कूल क्रिकेट टूर्नामेट में अपना पहला शतक 1936 में बनाया। फिर अगले वर्ष स्‍कूल क्रिकेट में 1200 रन बनाए जिनमें दो तिहरे शतक भी शामिल थे।

1988-89 में सचिन ने रणजी ट्राफी में बम्‍बई की तरफ से खेला और शतक बनाया। वह बम्‍बई की तरफ से खेलने वाला अब तक का सबसे कम उम्र का खिलाङी था। अगले वर्ष वह ईरानी ट्राफी के लिए टीम में शामिल हुआ और 103 रन बनाए।

उसके पश्‍चात् दलीप ट्राफी मे शामिल होने पर पश्चिमी जोन की ओर पूर्वी जोन के विरूद्ध 151 रन बनाए। इस प्रकार तीनों देशीय टूर्नामेंट में प्रथम बार भाग लेने पर शतक लगाने वाला प्रथम भारतीय खिलाङी बन गया।

जब सचिन और विनोद काम्‍बली ने मिल कर सेट जेवियर्स के विरूद्ध शारदाश्रम के 664 रन बनाए तक किसी भी क्रिकेट खेल के लिए यह विश्‍व रिकार्ड बन गया। इसमें सचिन ने 326 नोट आउट का स्‍कोर बनाया। फिर बाम्‍बे क्रिकेट की ओर से उसे वर्ष का सर्वश्रेष्‍ठ क्रिकेट खिलाङी घोषित किया गया।

1991 में 18 वर्ष की आयु में सचिन यार्कशायर का प्रतिनिधित्‍व करने वाला प्रथम खिलाङी बना। उस वर्ष उसे वर्ष का क्रिकेटर चूना गया।

1992 में वह पहला खिलाङी बना जिसे तीसरे अम्‍पायर द्वारा आउट करार दिया गया।

सचिन ने अपने खेल की शुरूआत से लगातार हर टैस्‍ट मैच खेला और लगातार 84 टैस्‍ट खेले।

सचिन 29 वर्ष 134 दिन की आयु में 100वां टैस्‍ट मैच खेलने वाला सबसे कम आयु का खिलाङी बना।

सचिन का पहला टैस्‍ट 1989 में कराची में हुआ जो कपिल का 100वां टैस्‍ट मैच था।

जिन खिलाङियों ने 100 या अधिक टैस्‍ट मैच खेले हैं, उनमें सचिन का औसत सर्वाधिक है या‍नी 57।99। जब कि उसके बाद मियादाद का 57।57 है और गावस्‍कर का (51।12)।

‘राजीव गांधी खेल रत्‍न‘ पुरस्‍कार पाने वाला वर्ष 2006 तक सचिन एकमात्र क्रिकेटर हैं।


1992 में 19 वर्ष की आयु में टैस्‍ट मैच में 1000 रन बनाने वाला सचिन विश्‍व का सबसे कम उम्र का खिलाङी है।
20 वर्ष की आयु से पूर्व टैस्‍ट मैच में 5 शतक बनाने वाला सचिन प्रथम व एकमात्र खिलाङी है।
सचिन ने अपना पहला टैस्‍ट शतक इंग्‍लैंड के विरूद्ध अनाया। तब उसने 119 रन बनाए और नॉट आउट रहा। पाकिस्‍तान के मुश्‍ताक मोहम्‍मद के बाद सचिन सबसे कम आयु का दूसरा खिलाङी है।

अक्‍टूबर 2002 मे सचिन 20000 रन बना कर अन्‍तर्राष्‍ट्रीय क्रिकेट में इतने रन बनाने वाला विश्‍व का प्रथम बल्‍लेबाज बन गया।

जुलाई, 2002 मे ‘बिजडन’ (लन्‍दन) द्वारा सचिन को ‘पीपुल्‍स च्‍वाइस’ अवार्ड दिया गया।

सचिन दुनिया का सफलतम बल्‍लेबाज है। 10 दिसम्‍बर, 2005 को सचिन 38 शतकों के साथ वन डे में सर्वाधिक 13909 रन बनाने वाला खिलाङी बना।

अगस्‍त 2004 तक सचिन ने 69 अर्द्धशतक बनाकर पाकिस्‍तान के कप्‍तान इंजमाम उल-हक के एक दिवसीय मैचों में सर्वाधिक अर्द्धशतक की बराबरी  कर ली। सचिन ने 339 मैचों में 69 अर्द्धशतक लगाए। जबकि इंजमाम ने 317 मैचों में 69 अर्धशतक बनाए।

सचिन 38 शतक बनाकर विश्‍व रिकार्ड बना चुका है।


सचिन ने 339 मैचों में 13415 रन बना लिए और विश्‍व में एक दिवसीय मैचों में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाङी बने, तब तक इंजमाम 317 मैचों में 9897 रन बनाकर रन बनाने के मामले में दूसरे नम्‍बर पर थे।

सचिन से पूर्व अजहरूद्दीन ने सर्वाधिक 334 एक दिवसीय मैच खेले थे। सचिन ने अगस्‍त 2004 तक 339 मैच खेल कर अजहरूद्दीन के रिकार्ड को पीछे छोङ दिया और भारत का सर्वाधिक मैच खेलने वाला खिलाङी बन गया।

339 मैच खेलने के बाद भी सचिन विश्‍व मे दूसरे नम्‍बर का खिलाङी है। विश्‍व का सर्वाधिक एक दिवसीय मैच खेलने वाला खिलाङी पाकिस्‍तान का पूर्व कप्‍तान वसीम अकरम है जिसने 356 मैच खेले।

50 बार वह ‘मैन ऑफ द मैच’ का पुरस्‍कार जीत चुका है। यह एक रिकार्ड है।

10 दिसम्‍बर 2005 को सचिन ने दिल्‍ली के फिरोजशाह कोटल मैदान पर टैस्‍ट मैचों में सर्वाधिक शतक (34 शतक) बनाने का सुनील गावस्‍कर का रिकार्ड तोङ दिया और अपना 35वां शतक श्रीलंका के खिलाफ बनाया। इस टेस्‍ट मैच मे उसने गावस्‍कर के 125 टैस्‍ट खेलने के रिकार्ड की भी बराबरी की।

टेस्‍ट मैच मे दस हजार से अधिक रन बनाने वाले सचिन सबसे युवा खिलाङी हैं।

विज्ञापनों की दुनिया का उन्‍हें बादशाह कहा जाता है। सारे रिकार्ड तोङते हुए 2006 मे उनहोंने आइकोनिक्‍स से 6 वर्ष के लिए 180 करोङ का अनुबंध किया। इससे पूर्व उन्‍होंने वर्ल्‍ड टेल के साथ 5 वर्ष का 100 करोङ का अनुबंध किया था।

वह वन डे में सर्वाधिक 13909 रन (दिसम्‍बर-2005 तक) बना चुके थे। हीरो होंडा स्‍पोर्ट्स आकदमी ने वर्ष 2004 के लिए सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का श्रेष्‍ठतम खिलाङी नामांकित किया।

मई 2006 तक सचिन 132 टैस्‍ट मैचों में 19469 रन और 362 वन डे मैचों में 14146 रन बना चुके थे।

सचिन को अक्‍सर क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। सचिन से यह पूछे जाने पर कि उन्‍हें यह सुनकर कैसा लगता है, उनका कहना था- मैं देवता नहीं हूं। लेकिन खुशी मिलती है जब मेरे देश के लोग मुझ पर इतना भरोसा जताते हैं। मैं देश के भाई-बहनों के चेहरे पर मुस्‍कान ला सकूं इससे बङी बात क्‍या होगी। भगवान ने यह वरदान दिया है।


35वां शतक बनाने पर सचिन ने कहा- वैसे तो सभी शतक महत्‍वपूर्ण रहे हैं। मैने पहला शतक 17 वर्ष की उम्र में इंग्‍लैंड के खिलाफ ओल्‍ड ट्रेफर्ड में जमाया था। पहला होने के कारण वह भी यादगार है और यह 35वां शतक भी सबसे यादगार रहेगा सचिन को भगवान में पूरा विश्‍वास है। साईं बाबा और गणपति के वह अनन्‍य भक्‍त हैं। 
सचिन तेंदुलकर सचिन तेंदुलकर Reviewed by Kahaniduniya.com on अक्तूबर 25, 2019 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

nicodemos के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.